बहुत दिन हुए तुम्हें ठीक से सोचा नहीं

sad shayari
Sad shayari

बहुत दिन हुए तुम्हें ठीक से सोचा नहीं पर जब तुम अपने नहीं
तो तुम्हें सोचूँ क्यों थोड़ी ख़ुशी मिलेगी और ढेर सारा ग़म

मंज़िलों के ग़म में रोने से मंज़िलें नहीं मिलती;
हौंसले भी टूट जाते हैं अक्सर उदास रहने से

दो जवाँ दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं
कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं।

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