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जितने अपने थे सब पराये थे | dr rahat indori shayari

जितने अपने थे सब पराये थे हम हवा को गले लगाये थे जितने कसमे थी सब की सर्मिन्दा जितने बादे थे सर झुकाये थे जितने आंसू थे सब थे बेगाने …

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dr rahat indori rawani shayari

नदी ने धूप से क्या कह दिया रवानी में

नदी ने धूप से क्या कह दिया रवानी में उजाले पांव पटकने लगे हैं पानी में ये कोई और ही किरदार है तुम्हारी तरह तुम्हारा ज़िक्र नहीं है मिरी कहानी …

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