gulzar sher o shayari

इंसान की khawish की कोई इंतहा नही | gulzar shayari

इंसान की khawish की कोई इंतहा नही दो गज जमीन भी चाहिये दो गज कफन के बाद इस तरह टूटे है की अब सिर्फ हँसते ही रहते है तुम सोच भी नही सकते हम कितना सोचते है तुम्हे खुद पर …

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gulzar shayari

कुछ तो चाहत रही होगी उन बारिश को बूंदों की

कुछ तो चाहत रही होगी उन बारिश को बूंदों की वरना को गिरता है जमीन पर आसमान तक पहुँचने के बाद । आदत थी मेरी सबसे हँसकर बोलने की पर मेरा यही शोक मुझे बदनाम कर गया । आंखे थी …

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