गुस्सा तुमसे करता हूँ अपना समझ के

hiगुस्सा तुमसे करता हूँ अपना समझ के,
इस बात का डर लगता है,
दूर न हो जाओ कही तुम मुझसे!
दूर न होना मुझको तुम बेगाना समझ के,
जीना मुश्किल हो जायेगा बिछुड़ के तुझसे!

प्यार भी तुमसे, तकरार भी तुमसे,
नाराज न होना तुम प्रिये,
मेरी जिंदगी की बहार है तुमसे!
भूल कर भी साथ न छोड़ना,
पागल हो जाऊंगा,
अगर जो टूट गई जिंदगी की डोर तुमसे!

मैं गुस्सा करता हूं, तो तुम उदास होती हो!
अकेले में तुम सिसक-सिसक के रोती हो!
तुम भी ना रोती मेरे गुस्से पे, गर पता होता तुमको,
परवाह तुम्हारी हर पल रहती मुझको,
हर पल दिल में होती हो

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *