ज़िन्दगी से बडी सज़ा ही नही | sad shayari

sad shayari hindi
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ज़िन्दगी से बडी सज़ा ही नही,
और क्या जुर्म है पता ही नहीं,
इतने हिस्सों में बँट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं.

तजुर्बे ने एक बात सिखाई है..
एक नया दर्द ही..
पुराने दर्द की दवाई है..!!

मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जाना;
तुम्हारे काम आ जायेगा, यह सामान ले जाना;
तुम्हारे बाद क्या रखना अना से वास्ता कोई;
तुम अपने साथ मेरा उम्र भर का मान ले जाना।

 

 

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