kbra se bheji Sada by nidhi narwal shayari in hindi

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Nidhi narwal kbra se bheji sada

Nidhi narwal shayari
Nidhi narwal shayari

सुनो क्या तुम मुझे सुन सकती हो
मुझे मालूम है मुश्किल है बहुत मुश्किल है*2
मग़र मेरे बिना दिल लगा लो ना*2
ओर मेरी एक हसरत है पूरी करोगें क्या
मेरी कब्र पर आकर कभी मुस्कुरा लो ना
में यहाँ ठीक हु बिल्कुल ठीक हु मैं बस
तुम्हे बता नही सकता *2


मेने पूछे है खुदा से खुदा के मंसूबे
तुम्हारे लिए वो बोला मसल रत देर तलक
तुमसे छुपा नही सकता यकीन मानो हम साथ
बैठकर लिख रहे है एक नई सुबह तुम्हारे लिए


 

मैं अपनी जान इस जहांन
मे लेकर आया ही नही हु * 2
अरे भूल तो नही गयी तुम जान हो मेरी ।
तो ख्याल रखो मेरी जान मेरी जान का
तुम मिट्टी के इस तरफ भी पहचान हो मेरी
मेरी एक तम्मना है मेरी कब्र्स पर रखा फूल                  अपनी ज़ुल्फों पर लगाओ सबर लो तुम


हा तुम्हे हक है अब भी उतना ही हक हैं
की इन फूलो का रंग सफेद सआड़ी में भर लो तुम
ये सुरक लाली आंखों की उतारो जो
आँखे रो रो कर लाल पड़ गयी है ।


ये सुरक लाली आंखों की उतारो फिर
रुकसार पर सजाओ इसे Ye बिंदी ततन्हा तन्हा
है आपने माथे पर जरा बिठाओ इसे ।
कली के जैसे लव तुम्हारे बन्द पड़े है । *2
वक़्त है खिलने का अब बताओ इसे ।


बेकसूर(अकेला) दिल को अब कब तक बेकश रखोगी ।
यू किसी ओर से मिलना भी सिखाओ इसे ।
में तेरे पयाल की झंकार सुनना चाहता हु *2
मेरे सिन पर टूटी चुडिया चीखती बहुत है
बहुत हो गया बस अब में तेरे कंगन
की खनगार सुनना चाहता हु


Kbra se bheji sada

अब ठीक है कोई बात नही ज़िन्दगी
आखिर सबकी महेमान हो तो होती है
वो जो इतनी नफरतो के बाद भी ,
खामियों के बाद भी,इतनी गलतियों के बाद भी ,
हमे कुबूल करती है देखो वो मौत भी
तो रहमान भी तो होती है ।


सुनो अगर अब भी महसुस करती हु
मुझे तो सुनो आपने महेमान से इस कदर
रूठी मत रहो जिंदगी तरस गयी हैं उस से
बात करो खुदा के बास्ते
तुम मौत से पहले मत मरो ।


अच्छा ऐसा करो जहाँ में दफन हु
ना वह बगीचा बना लो फिर मेरी कब्र में
खुशबू होगी फूलो को टूटना नही पड़ेगा ।
तू आती रह करना तुजे भी रंगों से छूटना नही पड़ेगा ।


Tu खोल कर देख क़भी घर अपना
तू खोल कर देख क़भी घर अपना
भी तुझे सुकून यू रो रो कर मेरी कब्र से लूटना नही पड़ेगा ।
Tu नूर है बेकसूर है आसमान की तरफ देख तल
सही एक दफा ,तुझे पंखों से अपने रूठना नही पड़ेगा


की क्यों क्यों ज्यादा स्वेत लिबास मेरे मरने
पर ही मिला आखिर क्यों ज्यादा स्वेत
लिबास मेरे मरने पर ही तुझे मिला
तू मरती तो अपनी ख़ुद ली अर्थी पर
भी लाल जोड़े में होती । Tu जलती जलती
खाक जोड़े में होती ।


तू जलती तो जोड़ा पहले राख
होता तू राख जोड़े में होती अरे तू
मरती तो अच्छा होता मर ही जाती
मगर तेरी रूह भी जिस्म से आज़ाद जोड़े में होती ।


क्योंकि ये जीत जागते कफ़न लपेट
कर घूमने का तो मुझे समझ नही आता
ये कफ़न बदन पर लपेट कर घूमने का
तो मुझे समझ नही आता
तू जिंदा है तो जी इसे ज्यादा क्या कहु
मुझे समझ नही आता तू ज़िन्दा है तो जी

Kbra se bheji Sada by nidhi narwal

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