तुज़से दोस्ती करने का हिसाब ना आया

sad shayari
Sad shayari

तुज़से दोस्ती करने का हिसाब ना आया,
मेरे किसी भी सवाल का जवाब ना आया,
हम तो जागते रहे तेरे ही ख़यालो मे,
और तुझे सो कर भी हमारा ख्वाब ना आया.

काश वो पल संग बिताए न होते,
जिनको याद कर के ये आँसू आये ना होते,
खुदा को अगर इस तरह दूर ले जाना ही था,
तो इतनी गहराई से दिल मिलाए ना होते.

दिल पे क्या गुज़री वो अनजान कए जाने,
प्यार किसे कहते है वो नादान क्या जाने,
हवा के साथ उड़ गये घर इस परिंदे का,
कैसे बना था घोसला वो तूफान क्या जाने !

 

 

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