Zubir ali tabish shayari – ज़ुबैर अली ताबिश शायरी ओर मुशायरे

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Zubir ali tabish shayari

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वो दुलहन बनकर रुक्सद हो गयी है
कहाँ तक कार का पीछा करोगे ।

मैं क्या बताऊ वो कितना करीब है
मेरे x2 मेरा खयाल भी उसको सुनाई देता है
वो जिसने आँख अदा की है
देखने के लिए उसी को छोड़ कर सब कुछ दिखाई देता है ।

Dr. Rahat indori shayari, hath khali hai tere saher se jate jate

Zubir ali tabish shayari

तुझे देखकर कुछ तो भुला हुआ हु ।
अरे याद आया मैं तो रूठा हुआ हु ।

दुआ मांग लू लेकिन दुआ से क्या होगा
खुदा है यार वो उसको तो सब पता होगा ।
तुम्हारा सिर्फ हवाओ पर सक गया होगा
चराग खुद भी तो जल जल के थक गया होगा
हमारा दिल तो हमेशासे ही एक जगह पर है
हमारा दिल तो हमेशासे ही एक जगह पर है
तुम्हरा दर्द बी रास्ता भटक गया होगा ।

ज़ुबैर अली ताबिश शायरी

खाली बैठे हो तो एक काम मेरा कर दो ना x2
मुझको अच्छा सा कोई जख्म अदा कर दो ना
ध्यान से पंछियो को देते हो दाना पानी
इतने अच्छे हो तो पिंजरे से रिहा कर दो ना ।
जब करीब आ ही गये हो तो उदासी कैसी x2
जब दीया दे ही रहे हो तो जला कर दो ना ।

Ansh pandit tikok shayari

Zubir ali tabish urdu shayari

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वो जिसने आँख अदा की देखने के लिए
उसको छोड़कर सबकुछ दिखाई देता है ।

मैं शायद उसी हाथ में रह गया हु ।
वही हाथ जो मुझसे छूटा हुआ था *2
किसी के जगह पर खड़ा हो गया मैं
किसी के जगह पर खड़ा हो गया मैं
मेरी सीट पर बैठा हुआ था

ज़ुबैर अली ताबिश शायरी

इसी खुशी ने मेरा दम निकाल रखा है
की उसने अब भी मेरा गम संभाल रखा है
मैं खाक ही तो हूँ आखिर मेरा बनेगा क्या x2
मुझे कुम्हार ने चक्कर में डाल रखा है ।
और मेरे खिलाफ मिले है कई सबूत मगर
मेरे वकील ने जज को संभाल रखा है ।

तेरे दर्शन हुआ करते थे पहले
हम एक दर्पन हुआ करते थे पहले ये जो

Dr. Rahat indori shayari, hath khali hai tere saher se jate jate

अपने बच्चों से बहुत डरता हूँ मैं
बिल्कुल अपने बाप के जैसा हूँ
मैं जिनको आसानी से मिल जाता हूँ मैं
वो समझते है बहुत सस्ता हूँ मैं
जा नदी से पूँछ शराबी मेरी किस घड़े ने कह दिया
प्यासा हूँ मैं मेरी ख्वाहिश है कि दरवाजा खुले वरना
खिड़की से भी आ सकता हूँ मैं दूसरे बस
तोड़ सकते है मुझे सिर्फ अपनी चाबी से खुलता हूँ मैं ।

Zubir ali tabish lyrics shayari

चले जाओ भी अब जी लेंगे पर सच कहो मजबूरी है क्या ?
मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या . . . .

गजल तो सबको मीठी लग रही थी
मगर नातिक को मिर्ची लग रही थी
तुम्हारे लभ नही चूमे थे
जब तक मुझे हर चीज कड़वी लग रही थी
मैं जिस दिन छोड़ने वाला था उसको वो उस
दिन सबसे प्यारी लग रही थी ।

Zubir ali tabish new shayari

ज़ुबैर अली उर्दू शायरी
ज़ुबैर अली उर्दू शायरी

इस ज़माने को ज़माने की अदा आती है
और एक हम है हमे सिर्फ वफ़ा आती है ।

सितम ढाते हुए सोचा करोगे हमारे साथ तुम ऐसा करोगे
अंगूठी तो मुझे लोटा रहे हो अंगूठी के निशा का क्या करोगे
। मैं तुमसे अब झड़ता भी नहीं हूँ तो क्या इस बात पर
झगड़ा करोगे वो दुल्हन बन कर रुक्सत हो गयी है कहाँ तक कार का पीछा करोगे ।

Zubir ali tabish shayari for whatsapp

भीड़ तो ऊंचा ही सुनेगी दोस्त x2
मेरी आवाज गिर पड़ेगी दोस्त मेरी
तकदीर तेरी खिड़की है मेरी तकदीर कब खुलेगी दोस्त
गाँव मेरा बहुत छोटा है तेरी गाड़ी नही रुकेगी दोस्त
और दोस्त लफ्ज में ही दो है दो सिर्फ तेरी नही चलेगी दोस्त ।

वो क्या है के फूलो को धोखा हुआ था
तेरा सूट तितली ने पेहेना हुआ था
मुझे क्या पता बाढ़ में कौन डूबा
मै कस्ती बनाने में डूबे हुआ था
मैं शायद उसी हाथ में रह गया हूँ
वही हाथ जो मुझ से छूटा हुआ था
किसी की जगह पर खड़ा हो गया
मैं मेरी सीट पर कोई बैठा हुआ था
पुरानी गजल डस्टबिन में पड़ी थी
नया शेर टेबल पर रखा हुआ था
तुम्हे देख कर कुछ तो भुला हुआ हूँ
अरे याद आया मैं रूठा हुआ था ।

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